इच्छाधारी नागिन की सच्ची कहानी | Ichchadhari Nagin Real Story in Hindi

 

Ichchadhari Nagin Ki Sachi Kahani
Ichchadhari Nagin Ki Sachi Kahani


Ichchadhari Nagin Aur Nagmani Ki Sachi Kahani


दुनिया में कई तरह के जीव पाए जाते हैं जिनमें सांपों को सबसे रहस्यमई माना जाता है खासकर इच्छाधारी सांप जो अपनी इच्छा से कोई भी रूप ले सकते हैं और अपनी शक्तियों से किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं । माना जाता है प्राचीन काल में नाग और नागिन एक साथ थे तभी कुछ शिकारियों ने उन्हें देख लिया उन्होंने नाग-नागिन पर हमला कर दिया । जिस वजह से नाग की जान चली गई और नागिन भी बुरी तरह घायल हो गई नागिन को बहुत ज्यादा तकलीफ और दुख का सामना करना पड़ा । उसके बाद उसने शिवजी की पूजा की वह उसकी पूजा से बेहद खुश हुए उन्हें उस नागिन पर दया आई उन्होंने नागिन को चमत्कारी शक्तियां दी । जिससे वह कभी भी अपना रूप बदल सकती थी साथ ही किसी से भी अपनी सुरक्षा कर सकती थी । वह कोबरा प्रजाति की थी आज भी अगर कोबरा प्रजाति का सांप सौ साल उम्र पूरी कर ले तो उनके पास नागमणि आ जाती है जिसकी अलौकिक शक्तियों से वह इच्छाधारी बन जाते हैं । कहां जाता है किसी कोबरा के जीवन के सौ साल पूरे करने के बाद स्वाति नक्षत्र की बूंदे उसके मुंह में गिर जाएं तो बाद में यही बूंद विकसित होकर नागमणि बन जाती है । यह नागमणि बहुत ज्यादा चमकती है जिससे सांप अंधेरे में खाना ढूंढ सकता है यह सांप की सारी इच्छाएं पूरी करती है । अगर किसी को यह मणि मिल जाए तो वह हमेशा स्वस्थ रहता है पैसे की कमी नहीं होती है उसकी इच्छाएं भी पूरी होती हैं । इस नागमणि की वजह से प्राचीन काल से ही सपेरे नाग-नागिन की तलाश में रहते हैं । नाग-नागिन के किस्से भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रचलित है । चीन की लोक कथाओं में दो ऐसे सांपों का पता चलता है जो एक दुर्गम पहाड़ों पर रहते थे सैकड़ों साल की तपस्या से वह सुंदर महिलाएं बन गई जो प्राचीन चीनी शहर के पास एक झील में रहती थी । इसके अलावा चीन के मशहूर कवि ने एक ऐसे सांप के बारे में लिखा था जिसका दिन के समय आधा शरीर सांप का और आधा महिला का था वह दिन में लोगों को अपने पास बुलाती थी और रात में उन्हें मार देती थी । ग्रीक माइथॉलजी में भी ऐसे ही चमत्कारी सांप का वर्णन देखने को मिलता है जो अमर माने जाते हैं । बुद्धिस्ट और जैन फिलासफी में ऐसे सांपो के बारे में पता चलता है जो अपनी इच्छा से इंसान का रूप ले सकते थे । हिंदू माइथोलॉजी में भी महाभारत में वर्णन मिलता है कि भीम के बेटे घटोत्कच की शादी एक नागकन्या से हुई थी । महाभारत में एक और जगह वर्णन मिलता है कि जब अर्जुन इंद्रप्रस्थ से 12 साल के वनवास के लिए गए तो वह पूर्वी क्षेत्र की ओर गए थे । एक सुबह जब वह गंगा नदी में स्नान कर रहे थे तभी किसी ने उसका पैर पकड़कर पानी के अंदर खींचा था और अपनी शक्ति से उन्हें धरती के अंदर लोक में ले गई । वह एक नाग कन्या थी जिसका नाम उलूपी था उसने अर्जुन से शादी करने को कहां लेकिन अर्जुन ने कहां वह अभी बनवास में है और उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा । उलूपी ने अर्जुन से कहां यह ब्रह्मचर्य केवल द्रोपदी के लिए है फिर अर्जुन उलूपी से शादी कर लेते हैं उलूपी अर्जुन से खुश होकर उन्हें वरदान देती है कि पानी के सभी जानवर अर्जुन की बात मानेंगे और उन्हें पानी में कोई नहीं हरा सकेगा । शिवजी के गले का नाग वासुकी एक इच्छाधारी नाग है जिसके पास नागमणि है । पहले इन इच्छाधारी सांपों से सामना होना आम बात थी लेकिन आबादी के बढ़ने से आजकल तो शायद ही किसी का सामना इन जीवो से होता है । आज दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिनका दावा है कि वह पिछले जन्म में इच्छाधारी नाग या नागिन थे । कुछ साल पहले एक लड़की ने यह दावा किया था कि वह पिछले जन्म में इच्छाधारी नागिन थी और एक गांव में मौजूद शिव मंदिर के पास अपने नाग के साथ रहती थी । वह दोनों सांप के रूप में कुए की दीवार पर एक साथ थे तभी अचानक एक नेवले ने उन्हें कुएं में ढकेल दिया जिससे उन दोनों की मृत्यु हो गई और उनका पुनर्जन्म हुआ है । लोगों ने लड़की की बात पर ध्यान नहीं दिया फिर वह उस गांव में गए जहां वह लड़की कभी नहीं आई थी लोगों को पता चला उसकी हर एक बात सच थी और यह भी माना कि नाग-नागिन का जोड़ा शिव मंदिर के पास रहता था और उनका शरीर उसी कुएं में पड़ा मिला था । 


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